जीर्ण गृह प्रवेश (Dilapidated home entry)
जीर्ण गृह प्रवेश (Renovation Home Entry) सनातन धर्म का वह संस्कार है जो किसी पुराने, मरम्मत किए गए या पुनः निर्मित घर में दोबारा प्रवेश करते समय किया जाता है। शास्त्रों में इसे 'द्वन्द्व' या 'जीर्णोद्धार' गृह प्रवेश भी कहा जाता है।
1. जीर्ण गृह प्रवेश क्या है, कब और क्यों किया जाता है?
1. What is dilapidated home Pravesh, when and why is it done?
क्या है: जब आप अपने पुराने पुश्तैनी घर की मरम्मत (Renovation) करवाते हैं, या किसी पुराने घर को खरीदकर उसमें बदलाव करते हैं, तो दोबारा रहने जाने की प्रक्रिया 'जीर्ण गृह प्रवेश' कहलाती है।
कब: जब घर का काम पूरी तरह संपन्न हो जाए और रंग-रोगन (Painting) के बाद घर शुद्ध हो जाए।
क्यों: निर्माण कार्य के दौरान तोड़-फोड़ से वास्तु पुरुष को कष्ट होता है। साथ ही, पुराने घर में जमा नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को बाहर निकाल कर नई ऊर्जा का संचार करने के लिए यह किया जाता है।
2. लाभ और दोषों से मुक्ति
2. Benefits and freedom from defects
दोष मुक्ति: यह पूजा 'वास्तु दोष', 'शिल्प दोष' (निर्माण की कमियां) और 'खनन दोष' (मिट्टी खोदने का दोष) से मुक्ति दिलाती है।
लाभ: इससे परिवार में अचानक आने वाली बीमारियां रुकती हैं, गृह क्लेश समाप्त होता है और रुके हुए आर्थिक कार्य पुनः सिद्ध होने लगते हैं।
3. मुहूर्त का महत्व
3. Importance of Muhurta
हाँ, इसे मुहूर्त के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
नियम: इसके लिए सूर्य का उत्तरायण होना अत्यंत शुभ माना जाता है।
वर्जित समय: मलमास (खरमास), श्राद्ध पक्ष और शुक्र या गुरु तारा अस्त होने पर यह पूजा नहीं करनी चाहिए। स्थिर लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) में प्रवेश श्रेष्ठ है।
4. प्रमुख देवता और वेदी निर्माण
4.The main deity and the construction of the altar(vedi)
प्रमुख देवता: इसके अधिपति देवता 'वास्तु पुरुष' हैं। साथ ही 'क्षेत्रपाल' (भूमि के रक्षक) की विशेष पूजा होती है।
वेदी निर्माण:
वास्तु मण्डल: 64 या 81 पदों वाली मुख्य वेदी।
षोडश मातृका वेदी: 16 देवियों की पूजा के लिए।
नवग्रह वेदी: ग्रहों की शांति हेतु।
पूर्णकुंभ (कलश): सुख-समृद्धि का प्रतीक।
योगिनी वेदी: नकारात्मक शक्तियों के शमन के लिए।
5. मंत्र और जाप संख्या
मुख्य मंत्र: वास्तु शांति का वैदिक मंत्र:
"ॐ वास्तोष्पते प्रतरणो न एधि गयस्फानो गोभिरश्वेभिरिन्दो। अजऱासस्ते सख्ये स्याम पितेव पुत्रान्प्रति नो जुषस्व॥"
न्यूनतम जाप: शास्त्रीय विधान के अनुसार कम से कम 5,100 जाप अनिवार्य हैं। यदि दोष अधिक हो, तो 21,000 जाप का संकल्प लिया जाता है।
ब्राह्मण: इस कार्य के लिए कम से कम 1 मुख्य आचार्य और 2 सहायक ब्राह्मण (कुल 3) आवश्यक हैं। बड़े अनुष्ठान में 5 ब्राह्मण भी रखे जा सकते हैं।
6. कैवल्य एस्ट्रो (Kaivalya Astro) ऐप के माध्यम से कैसे कराएं?
6. How to get it done through Kaivalya Astro App?
कैवल्य एस्ट्रो ऐप के जरिए आप घर बैठे ही विद्वान ब्राह्मणों से यह अनुष्ठान संपन्न करा सकते हैं:
मुहूर्त चयन (Check Muhurat): ऐप के 'Panchang' या 'Muhurat' सेक्शन में जाकर अपनी जन्म कुंडली और स्थान (Location) के अनुसार सबसे सटीक 'जीर्ण गृह प्रवेश' मुहूर्त प्राप्त करें।
पूजा बुकिंग (Book Pooja): 'Rituals' टैब में 'Jirna Griha Pravesh' या 'Vastu Shanti' विकल्प चुनें।
ई-पूजा या फिजिकल पूजा: आप ऐप के जरिए पंडित जी को घर बुला सकते हैं या 'Live Video' के माध्यम से 'E-Pooja' भी करवा सकते हैं।
सामग्री लिस्ट: बुकिंग के बाद ऐप आपको 'Checklist' देगा कि आपको घर पर किन-किन सामग्रियों (जैसे आम के पत्ते, गोबर, पंचगव्य आदि) की व्यवस्था करनी है।
सुझाव: पुराने घर में प्रवेश से पहले 'वास्तु शांति' के साथ 'नारायण बलि' या 'पुण्याहवाचन' कराना और भी अधिक फलदायी होता है।
ध्यातव्य विषय:- अनुष्ठान सेवा राशि 1 आचार्य और सहायक सहित एक दिवसीय पूजन 21000 है और तीन दिवसीय हेतु 51000 है
Note: The ritual service fee (Anushthan Sewa Rashi) is 21,000 for one day and 51,000 for three days.
घर पर अनुष्ठान कराने पर आने जाने का व्यय और सामग्री का व्यय अलग से देना होगा
On getting it done at home, the transportation cost will be paid separately and the material will have to be brought by yourself.