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Astro provides online Puja service

रोग प्रतिरोधक काली मन्त्र साधना(Disease Resistance Kali Mantra Sadhana)

 पूर्ण अनुष्ठान सेवा - 51000(संपूर्ण सामग्री और आचार्य खर्च सहित)

Complete ritual service - Rs 51000 (including all material and acharya expenses)

घर पर करवाने पर मार्ग के आने जाने का व्यय और रहने की व्यवस्था यजमान की रहेगी  

If the house is being arranged, the travel expenses and accommodation will be borne by the host.

रोग प्रतिरोधक काली साधना माता महाकाली के उस सौम्य और रक्षक रूप की उपासना है, जो शरीर के भीतर की नकारात्मक ऊर्जा और व्याधियों (बीमारियों) का नाश कर जीवनी शक्ति (Immunity) को बढ़ाती है। तंत्र शास्त्र में माँ काली को 'काल' (समय और मृत्यु) पर विजय प्राप्त करने वाली देवी माना गया है।


1. रोग प्रतिरोधक काली साधना का परिचय और उद्गम

1. Introduction and Origin of the Anti-Disease Kali Sadhana

माँ काली की उत्पत्ति अधर्म और विनाशकारी शक्तियों के अंत के लिए हुई थी।

  • पौराणिक उद्गम: मार्कण्डेय पुराण के 'दुर्गा सप्तशती' के अनुसार, जब 'रक्तबीज' नामक दैत्य का आतंक बढ़ा, तब माँ चण्डिका की भृकुटी से काली प्रकट हुईं। आध्यात्मिक रूप से, रक्तबीज हमारे शरीर के वे दूषित सेल (Cells) या वायरस हैं जो तेजी से बढ़ते हैं। माँ काली उन सूक्ष्म शत्रुओं (रोगों) का भक्षण कर शरीर की रक्षा करती हैं।

  • शास्त्रों में उल्लेख: इस साधना का विस्तृत वर्णन 'कालिका पुराण', 'तन्त्रालोक' और 'वि़श्वसार तन्त्र' में मिलता है। आयुर्वेद और तंत्र के संगम में माँ काली को 'आरोग्य प्रदात्री' कहा गया है।


2. साधना के लाभ और उपयोगिता

2. Benefits and utility of spiritual practice

यह साधना केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि प्राणिक ऊर्जा को बढ़ाने वाली है:

  • अजेय स्वास्थ्य: शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) में चमत्कारिक वृद्धि।

  • मानसिक सुदृढ़ता: भय, अवसाद (Depression) और असाध्य रोगों के मानसिक डर से मुक्ति।

  • नकारात्मकता का नाश: नजर दोष, तंत्र बाधा और बाहरी कुप्रभावों से सुरक्षा कवच।

  • दीर्घायु: अकाल मृत्यु के योग टलते हैं और जातक दीर्घायु प्राप्त करता है।


3. साधना विधान, अवधि और मंत्र संख्या

3. Method of Sadhana, duration and number of mantras

विवरणविस्तृत जानकारी
शुद्ध मूल मंत्र"ॐ क्रीं काल्यै नमः" या "ॐ क्रीं ह्नीं ह्रूं दक्षिणे कालिके स्वाहा।"
रोग नाशक विशेष मंत्र"जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥"
जप संख्यापूर्ण फल के लिए 11,000 मंत्रों का अनुष्ठान।
ब्राह्मण संख्यासामान्यतः 3 ब्राह्मणों द्वारा सामूहिक जाप।
अनुष्ठान अवधियह साधना 3 दिन   में पूर्ण की जाती है।

4. कैवल्य एस्ट्रो (Kaivalya Astro) ऐप पर लाइव पूजा प्रक्रिया

4. Live Puja Process on Kaivalya Astro App

कैवल्य एस्ट्रो ऐप आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्राचीन शक्ति साधना को आपके घर तक पहुँचाता है:

  1. पंजीकरण: Kaivalya Astro ऐप पर जाकर 'Astro service' या 'Mahakali Anushthan' का चयन करें।

  2.  विशेषज्ञ परामर्श: ऐप के वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य आपकी कुंडली के छठे भाव (रोग भाव) का विश्लेषण कर पूजा का संकल्प तय करेंगे।

  3. लाइव अनुष्ठान: आप अपने फोन पर लाइव जुड़कर ब्राह्मणों को मंत्र जाप करते देख सकते हैं। इसमें माँ काली का 'कवच' पाठ और 'अर्गला स्तोत्र' का विशेष सम्पुट लगाया जाता है।

  4. हवन का दर्शन: साधना के अंतिम दिन होने वाले 'रोग नाशक हवन' में आप लाइव आहुतियां देख सकते हैं।

  5. रक्षा कवच: पूजा के बाद सिद्ध किया हुआ 'काली यंत्र' या 'काली गुटिका' आपके पते पर भेजी जाती है, जिसे धारण करने से निरंतर सुरक्षा बनी रहती है।


5. किसी भक्त द्वारा उद्गम का व्याख्यान

5. Explanation of the origin by a devotee

इतिहास में रामकृष्ण परमहंस माँ काली के सबसे बड़े उपासक रहे हैं। उन्होंने सिद्ध किया कि माँ काली केवल संहारक नहीं, बल्कि करुणा की मूर्ति हैं। एक बार जब उनके एक शिष्य को गंभीर व्याधि हुई, तो उन्होंने माँ काली के 'भवतारिणी' रूप की साधना कर उसे रोगमुक्त किया। यह साधना उसी परंपरा का हिस्सा है जहाँ 'मृत्यु' को 'अमृत' में बदलने की प्रार्थना की जाती है।


विशेष निर्देश(Special Instructions):

  • वस्त्र: साधना के दौरान काले या लाल वस्त्रों का प्रयोग वर्जित नहीं है, लेकिन सात्विक साधना हेतु लाल वस्त्र श्रेष्ठ हैं।

  • दिशा: माँ काली की साधना हमेशा दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर मुख करके की जाती है।

  • समय: यह साधना रात्रि काल में (निशिता काल) अधिक फलदायी होती है।