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वट सावित्री व्रत(Vat Savitri vrat katha)

व्रत कथा की सेवा राशि 1500 है 

The service amount for the Vrat Katha is Rs 1500.

अपने घर पर करवाने पर आने जाने का व्यय अलग से देना होगा और सामग्री स्वयं से लानी होगी

If you get it done at your home, you will have to pay for the travel expenses separately and bring the materials yourself.


वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति में सतीत्व और अटूट दाम्पत्य प्रेम का सर्वोच्च प्रतीक है। यह व्रत पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए समर्पित है।

1. पर्व का समय और माह | Time and Month of the Festival

  • तिथि (Date): यह व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाता है। (कुछ क्षेत्रों, विशेषकर महाराष्ट्र और गुजरात में इसे ज्येष्ठ पूर्णिमा को 'वट पूर्णिमा' के रूप में मनाया जाता है)।

  • माह (Month): मुख्य रूप से यह 'ज्येष्ठ' (मई-जून) के महीने में आता है।

2. पूजन के देव और अधिष्ठाता | Deities of Worship

  • मुख्य देव (Primary Deities): इस व्रत में भगवान ब्रह्मा, माता सावित्री, भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और यमराज का पूजन किया जाता है।

  • वट वृक्ष (Banyan Tree): वट वृक्ष को साक्षात त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव का वास माना गया है।

3. व्रत की कामना और लाभ | Desire and Benefits of the Fast

  • कामना (Wish): सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और संतान प्राप्ति की कामना से यह व्रत रखती हैं।

  • लाभ (Benefits): धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और यमराज के कोप से मुक्ति मिलती है। यह व्रत स्त्रियों को 'अखंड सौभाग्यवती' होने का फल प्रदान करता है।

4. व्रत सर्वप्रथम किसने रखा और प्रारम्भ | Who First Observed and Origin

  • सर्वप्रथम किसने रखा (First Observed By): यह व्रत सर्वप्रथम राजकुमारी सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण बचाने के लिए रखा था।

  • प्रारम्भ (Origin): सावित्री ने यमराज का पीछा किया और अपनी बुद्धिमत्ता व पातिव्रत्य धर्म के बल पर मृत पति सत्यवान को पुनर्जीवित करवा लिया। तभी से यह परंपरा शुरू हुई।

5. वेदों और शास्त्रों में उल्लेख | Mention in Vedas and Scriptures

  • वट सावित्री व्रत का विस्तृत वर्णन मत्स्य पुराण, स्कंद पुराण और भविष्योत्तर पुराण में मिलता है। महाभारत के 'वन पर्व' में भी सावित्री और सत्यवान की इस महान कथा का उल्लेख मिलता है, जिसे ऋषि मार्कण्डेय ने युधिष्ठिर को सुनाया था।

6. व्रत के नियम | Rules of the Fast

  • स्नान और श्रृंगार: व्रत के दिन प्रातः स्नान कर सोलह श्रृंगार करना चाहिए।

  • वट पूजा: वट वृक्ष (बरगद) के चारों ओर सूती धागा (कच्चा सूत) लपेटते हुए सात बार परिक्रमा की जाती है।

  • कथा श्रवण: सावित्री और सत्यवान की कथा सुनना अनिवार्य माना जाता है।

  • सात्विकता: इस दिन पूर्णतः सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज) किया जाता है, कई महिलाएं निराहार रहकर भी इसे पूर्ण करती हैं।


7. कैवल्य एस्ट्रो ऐप के माध्यम से पूजन | Puja via Kaivalya Astro App

Kaivalya Astro ऐप वट सावित्री व्रत को पूर्ण विधि-विधान से करने में आपकी सहायता करता है:

  • ऑनलाइन व्रत कथा (Online Vrat Katha): ऐप पर आप अनुभवी पंडितों द्वारा वट सावित्री की प्रामाणिक पौराणिक कथा का श्रवण कर सकते हैं, जो व्रत का सबसे महत्वपूर्ण अंग है।

  • लाइव पंडित सेवा (Live Pandit Service): यदि आप घर के पास वट वृक्ष की पूजा कर रहे हैं, तो ऐप के माध्यम से पंडित जी से ऑनलाइन जुड़कर मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कर सकते हैं।

  • सटीक मुहूर्त (Accurate Muhurat): अमावस्या तिथि के प्रारंभ, समाप्त होने और पूजा के सबसे शुभ चौघड़िया मुहूर्त की जानकारी ऐप के पंचांग में उपलब्ध रहती है।