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वास्तु समृद्धि पूजन (Vastu Samriddhi Puja)

वास्तु समृद्धि पूजन एक विशेष आध्यात्मिक अनुष्ठान है, जिसका उद्देश्य केवल घर के दोषों को दूर करना ही नहीं, बल्कि उस स्थान को धन, धान्य और खुशहाली से भरना होता है। यह पूजा 'वास्तु शांति' का ही एक उन्नत रूप है, जिसमें समृद्धि के लिए लक्ष्मी-कुबेर का भी आह्वान किया जाता है।


1. वास्तु समृद्धि पूजन: क्या, कब और क्यों?

1. Vastu Samriddhi Puja: What, when and why?

  • क्या है: यह भवन के वास्तु पुरुष को जागृत करने और घर की ऊर्जा को आर्थिक उन्नति (Prosperity) से जोड़ने की प्रक्रिया है।

  • क्यों किया जाता है: कई बार घर का वास्तु सही होने के बावजूद बरकत नहीं होती। ऐसी स्थिति में घर की 'प्राण ऊर्जा' को बढ़ाने और लक्ष्मी के वास के लिए यह पूजन किया जाता है।

  • कब किया जाता है: * नए घर या व्यापारिक प्रतिष्ठान के उद्घाटन पर।

    • व्यवसाय में लगातार घाटा होने पर।

    • घर में सुख-शांति का अभाव होने पर।

    • हर वर्ष घर की वर्षगांठ या दीपावली के आस-पास इसे करना अत्यंत शुभ होता है।

2. लाभ और दोष मुक्ति 

2. Benefits and Demerits

  • लाभ: व्यापार में वृद्धि, अटका हुआ धन प्राप्त होना, परिवार में सौहार्द और सकारात्मक सोच का विकास।

  • दोष मुक्ति: यह मुख्य रूप से 'शिल्प दोष' (गलत निर्माण), 'कोण दोष' (दिशाओं का असंतुलन) और 'भू-दोष' (मिट्टी की अशुद्धता) से मुक्ति दिलाता है।

3. मुहूर्त और समय 

3. Muhurta and time

हाँ, यह पूजा मुहूर्त के बिना निष्फल मानी जाती है।

  • शुभ समय: स्थिर लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) में यह पूजा सबसे फलदायी होती है।

  • विशेष: गुरुवार या शुक्रवार के दिन, यदि शुभ नक्षत्र (जैसे पुष्य, रेवती या रोहिणी) हो, तो समृद्धि का फल कई गुना बढ़ जाता है।

4. प्रमुख देवता, वेदी और मंत्र 

4. Principal deities, altars(vedi) and mantras

  • प्रमुख देवता: इसके मुख्य देवता 'वास्तु पुरुष' हैं। साथ ही समृद्धि के लिए 'कुबेर' और 'माता महालक्ष्मी' की विशेष पूजा होती है।

  • वेदी निर्माण: 1. वास्तु मण्डल: 81 पदों वाली मुख्य वेदी।

    2. लक्ष्मी-कुबेर वेदी: स्वर्ण या चांदी के सिक्कों/यंत्रों के साथ।

    3. दिक्पाल वेदी: दसों दिशाओं के रक्षकों की पूजा के लिए।

    4. पञ्च लोकपाल वेदी: पंच तत्वों के संतुलन हेतु।

  • प्रमुख मंत्र: > "ॐ वास्तोष्पते प्रतरणो न एधि गयस्फानो गोभिरश्वेभिरिन्दो।" साथ ही लक्ष्मी समृद्धि के लिए श्रीसूक्त का पाठ किया जाता है।

  • जाप संख्या: वास्तु मंत्र का कम से कम 11,000 जाप होना चाहिए। यदि समृद्धि की विशेष कामना हो, तो 21,000 जाप का अनुष्ठान श्रेष्ठ है।

  • ब्राह्मण: न्यूनतम 3 ब्राह्मण (एक आचार्य और दो सहायक) इस कार्य के लिए अनिवार्य हैं।

5. ग्रंथों में उल्लेख 

5. mentioned in the Grantha 

वास्तु समृद्धि पूजन का विस्तृत वर्णन इन प्राचीन ग्रंथों में मिलता है:

  • विश्वकर्मा प्रकाश: यह वास्तु शास्त्र का सबसे प्रामाणिक ग्रंथ है।

  • मत्स्य पुराण: इसमें वास्तु पुरुष की उत्पत्ति और पूजन विधि का वर्णन है।

  • बृहत्संहिता: वराहमिहिर द्वारा रचित इस ग्रंथ में भवन और समृद्धि के संबंधों को बताया गया है।


6. कैवल्य एस्ट्रो (Kaivalya Astro) ऐप के माध्यम से कैसे कराएं?

6. How to do it through the Kaivalya Astro app?

कैवल्य एस्ट्रो ऐप आपकी पूजा को पूर्णतः शास्त्रोक्त विधि से कराने में आपकी मदद करता है:

  1. विशेषज्ञ परामर्श: ऐप पर आप Vastu Expert से जुड़कर अपने घर का डिजिटल मैप (नक्शा) चेक करवा सकते हैं ताकि यह पता चले कि पूजा के साथ किसी रत्न या यंत्र की जरूरत है या नहीं।

  2. मुहूर्त सेवा: ऐप के 'Muhurat' सेक्शन में जाकर अपने शहर और नाम के अनुसार 'Vastu Samriddhi' का सबसे सटीक समय चुनें।

  3. पंडित बुकिंग: आप अपनी सुविधानुसार Vedic Pandits की टीम बुक कर सकते हैं। कैवल्य एस्ट्रो सुनिश्चित करता है कि ब्राह्मण शुद्ध उच्चारण और विधि-विधान में निपुण हों।

  4. यंत्र और सामग्री: पूजा के लिए आवश्यक सिद्ध वास्तु यंत्र या कुबेर यंत्र आप ऐप के ई-कॉमर्स स्टोर से सीधे मंगवा सकते हैं, जो ब्राह्मणों द्वारा पहले से अभिमंत्रित होते हैं।

  5. ऑनलाइन ट्रैकिंग: पूजा फिक्स होने के बाद आपको पंडित जी का विवरण और पूजा की पूरी 'चेकलिस्ट' मिल जाती है।

    ध्यातव्य विषय:- अनुष्ठान सेवा राशि एक दिवसीय हेतु 21000 है और त्रिदिवसीय हेतु 51000 है |

    Note: The ritual service fee (Anushthan Sewa Rashi) is 21,000 for one day and 51,000 for three days.

    घर पर अनुष्ठान कराने पर आने जाने का व्यय और सामग्री का व्यय अलग से देना होगा 

    If the ritual is performed at home, the travel expenses and material expenses will have to be paid separately.