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शनिवार व्रत कथा (Saturday Fast Story)

शनिवार का व्रत न्याय के देवता और कर्मफलदाता शनि देव को समर्पित है। नवग्रहों में शनि को सबसे शक्तिशाली और अनुशासित ग्रह माना जाता है। इस व्रत को करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और अटके हुए कार्य पूरे होते हैं।

यहाँ शनिवार व्रत की पूरी विस्तृत जानकारी दी गई है:


1. नवग्रह में यह वार किस ग्रह का है?

1. Which planet's day is this in the Navagraha?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनिवार 'शनि ग्रह' (Saturn) का दिन है। शनि देव को 'मदं' भी कहा जाता है क्योंकि उनकी गति धीमी है। वे व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल (दंड या पुरस्कार) देते हैं।

2. यह व्रत कब और किसे करना चाहिए?

2. When and who should observe this fast?

  • प्रारंभ: किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार से इसे शुरू करना श्रेष्ठ है। सावन के महीने में शनिवार व्रत शुरू करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

  • किसे करना चाहिए: * जिन्हें शनि की साढ़े साती या ढैय्या चल रही हो।

    • जिनकी कुंडली में शनि नीच का या अशुभ फल दे रहा हो।

    • जो लोग कानूनी विवादों, बीमारी या भारी कर्ज से परेशान हों।

    • सफलता और स्थिरता चाहने वाले जातक।

3. व्रत के नियम और विधि

3. Rules and methods of fasting

  • रंग का चयन: शनिवार को नीले या काले रंग के वस्त्र पहनना शुभ होता है।

  • पूजन स्थल: पीपल के वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें और सरसों के तेल का दीपक (दीया) जलाएं।

  • दान का महत्व: इस दिन काले तिल, काला कपड़ा, लोहा, या सरसों के तेल का दान करना चाहिए।

  • वर्जनाएं: शनिवार के दिन लोहा, नमक, तेल या काली वस्तुएं खरीदकर घर नहीं लानी चाहिए। इस दिन किसी गरीब या असहाय का अपमान भूलकर भी न करें।

4. खान-पान: क्या खाएं और क्या न खाएं?

4. Food and Drink: What to eat and what not to eat?

  • क्या खाएं: व्रत में शाम को एक समय भोजन किया जाता है। भोजन में उड़द की दाल की खिचड़ी या तिल से बनी वस्तुएं शामिल करें।

  • क्या न खाएं: इस दिन दूध, दही और सफेद वस्तुओं का सेवन कम से कम करना चाहिए (यदि आवश्यक हो तो उसमें थोड़ा गुड़ या काला तिल मिला लें)। मांस, मदिरा और तामसिक भोजन पूरी तरह वर्जित है।


5. शनिवार व्रत कथा (संक्षेप में)

5. Saturday Vrat Katha (in short).

एक बार नवग्रहों में विवाद छिड़ गया कि सबसे बड़ा कौन है। वे राजा विक्रमादित्य के पास न्याय के लिए पहुंचे। राजा ने सोने, चांदी, कांसे आदि के सिंहासन बनवाए और ग्रहों को बैठने को कहा। शनि देव को सबसे अंत में लोहे का सिंहासन मिला, जिससे वे क्रोधित हो गए और राजा को श्राप दिया।

शनि की साढ़े साती के कारण राजा विक्रमादित्य को दर-दर भटकना पड़ा, उनके हाथ-पैर काट दिए गए और उन्होंने तेली के यहाँ काम किया। लेकिन राजा ने धैर्य नहीं खोया और शनि देव की कठिन भक्ति की। अंत में शनि देव प्रसन्न हुए, उन्हें दर्शन दिए और उनका खोया हुआ राज्य और मान-सम्मान वापस लौटा दिया। तब से शनि देव की कृपा पाने के लिए यह व्रत प्रचलित हुआ।

6. वेदों और शास्त्रों में उल्लेख

6. Mention in the Vedas and scriptures

शनि देव का वर्णन मत्स्य पुराण, ब्रह्म पुराण और पद्म पुराण में विस्तार से मिलता है। ऋग्वेद के कुछ सूक्तों में भी सौरमंडल के क्रूर ग्रहों की शांति के मंत्र दिए गए हैं। 'शनि चालीसा' और 'शनि स्तोत्र' (जो राजा दशरथ द्वारा रचित है) का पाठ शास्त्रों में अति उत्तम बताया गया है।


7. कैवल्य एस्ट्रो (Kaivalya Astro) ऐप के जरिए पूजन और कथा

7. Puja and Katha through Kaivalya Astro App

कैवल्य एस्ट्रो ऐप आपके शनि दोष निवारण और व्रत को सरल बनाने में मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है:

  • शनि दोष रिपोर्ट: ऐप के जरिए आप अपनी कुंडली का विश्लेषण कर सकते हैं कि आपको साढ़े साती या ढैय्या चल रही है या नहीं।

  • मंत्र और स्तोत्र: ऐप में 'मंत्र' सेक्शन में जाकर आप 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का जाप माला के साथ कर सकते हैं। यहाँ राजा दशरथ कृत शनि स्तोत्र भी उपलब्ध है।

  • दान गाइडेंस: ऐप आपको बताता है कि आपकी राशि के अनुसार आपको किस शनिवार को क्या दान करना चाहिए (जैसे छाया दान - एक कटोरी तेल में अपना चेहरा देखकर उसे दान करना)।

  • विशेष उपाय: यदि आपका शनि भारी है, तो ऐप के विशेषज्ञ ज्योतिषी आपको शनिवार की विशेष पूजा या रत्न धारण करने की सलाह भी दे सकते हैं।

    नोट: व्रत कथा पूजन सेवा राशि 1500 है जिसमे पंडित जी पूजन व कथा करेंगे 

    Note: The cost of Vrat Katha Poojan Seva is Rs 1500 in which Pandit ji will perform the puja and katha.

    घर पर करवाने पर मार्ग के आने जाने का व्यय अलग से देय होगा और सामग्री स्वयं से लानी होगी। 

     If it is done at home, the travel expenses will be payable separately and the material will have to be brought by yourself.