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श्रीमद्भागवत कथा परायण(Shrimad Bhagwat Katha Paarayan)

अनुष्ठान साधना शुल्क - 18000(आचार्य दक्षिणा सहित)

Ritual Sadhana Fee - 18000 (Including Acharya Dakshina)

घर पर करवाने पर मार्ग के आने जाने का व्यय और रहने की व्यवस्था यजमान की रहेगी  

If the house is being arranged, the travel expenses and accommodation will be borne by the host.

श्रीमद्भागवत कथा परायण: मोक्ष प्रदायिनी और कलयुग के संतापों को हरने वाली महासाधना

श्रीमद्भागवत पुराण को हिंदू धर्म के अठारह पुराणों में 'सर्वस्व' और 'निगम-कल्पतरु' (वेदों रूपी वृक्ष का पका हुआ फल) माना गया है। यह केवल एक कथा नहीं, बल्कि साक्षात श्रीकृष्ण का वांग्मय (शब्दरूपी) विग्रह है। इसकी साधना या श्रवण से व्यक्ति जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।


1. पूर्ण परिचय और शास्त्रीय आधार

1. Complete introduction and scriptural basis

श्रीमद्भागवत में 12 स्कन्ध, 335 अध्याय और 18,000 श्लोक हैं। इसमें भगवान विष्णु के 24 अवतारों और मुख्य रूप से श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन है।

  • शास्त्रीय उल्लेख: इसका उल्लेख 'पद्म पुराण' के 'भागवत माहात्म्य' खंड में मिलता है। वेदों के सार को समझाने के लिए महर्षि वेदव्यास ने इसकी रचना की थी।

  • उद्गम कथा: जब महर्षि वेदव्यास ने चारों वेद और महाभारत लिख दिए, फिर भी उनके मन को शांति नहीं मिली। तब देवर्षि नारद के उपदेश पर उन्होंने केवल भगवान की लीलाओं पर केंद्रित इस 'परमहंसों की संहिता' (भागवत) की रचना की।

  • प्रथम उपदेश: इसका प्रथम सार्वजनिक प्रवचन शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को गंगा तट पर दिया था, जिससे उन्हें 7 दिनों में मोक्ष प्राप्त हुआ।


2. साधना के लाभ (Benefits of Sadhna)

  1. पितृ मुक्ति: जिस परिवार में भागवत परायण होता है, वहां की सात पीढ़ियां और अतृप्त पूर्वज मोक्ष प्राप्त करते हैं।

  2. पाप नाश: कलयुग के जाने-अनजाने में किए गए जघन्य पापों का प्रायश्चित होता है।

  3. भय मुक्ति: अकाल मृत्यु और मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।

  4. मनोकामना पूर्ति: भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति के साथ-साथ भौतिक सुखों का विस्तार होता है।

  5. शुद्धिकरण: घर का वातावरण पवित्र होता है और नकारात्मक ऊर्जा का समूल नाश होता है।


3. साधना का विस्तृत विधान (समय, ब्राह्मण और विधि)

3. Detailed procedure for Sadhana (time, Brahmin and method)

श्रीमद्भागवत साधना मुख्य रूप से दो प्रकार से होती है: सप्ताह परायण (7 दिन) और मृदु पाठ

  • साधना की अवधि: * सप्ताह परायण: यह 7 दिन में पूर्ण होती है।

    • मूल पाठ: यदि केवल श्लोकों का पाठ किया जाए, तो यह ब्राह्मणों द्वारा 9 दिन में भी पूर्ण की जाती है।

  • ब्राह्मणों की संख्या: * 1 मुख्य वक्ता (आचार्य): जो कथा सुनाते हैं।

    • 1 सहायक ब्राह्मण: जो भागवत के मूल श्लोकों का पाठ (पारायण) करते हैं।

  • मंत्र और श्लोक संख्या: * इसमें मूल 18,000 श्लोकों का पाठ किया जाता है।

    • मुख्य मंत्र (मूल मंत्र): "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" 

  • विधि: पूजा स्थल पर 'भागवत पोथी' की स्थापना, अखंड दीप, तुलसी अर्चन और प्रतिदिन भगवान के विभिन्न उत्सवों (नंदोत्सव, रुक्मिणी विवाह आदि) का आयोजन।


4. कैवल्य एस्ट्रो (Kaivalya Astro) ऐप पर लाइव पूजा विधि

4. Live Puja Vidhi on Kaivalya Astro App

कैवल्य एस्ट्रो ऐप के माध्यम से आप विश्व के किसी भी कोने से इस महापुण्य का लाभ ले सकते हैं:

  1. पंजीकरण एवं चयन: ऐप पर 'Srimad Bhagwat Path' या 'Saptah Parayan' विकल्प चुनें।

  2. विद्वान चयन: आप वृंदावन या वाराणसी के सिद्ध विद्वानों का चुनाव कर सकते हैं।

  3. लाइव संकल्प: पूजा के प्रथम दिन आचार्य आपसे वीडियो कॉल के जरिए आपके पितरों की शांति या आपकी विशेष इच्छा हेतु लाइव संकल्प करवाएंगे।

  4. लाइव श्रवण (Streaming): प्रतिदिन 3 से 4 घंटे की कथा और मूल पाठ का Live प्रसारण  होगा। आप अपने परिवार के साथ घर बैठे इस दिव्य वाणी को सुन सकते हैं।

  5. वर्चुअल उत्सव: कृष्ण जन्म या रुक्मिणी विवाह जैसे उत्सवों में आप अपनी ओर से लाइव आरती कर सकते हैं।

  6. पूर्णता: 7वें दिन हवन का लाइव दर्शन होगा और अभिमंत्रित 'भागवत प्रसाद' एवं 'तुलसी माला' आपके घर कूरियर की जाएगी।


5. भक्त के द्वारा उद्गम का व्याख्यान

5. Explanation of the origin by a devotee

श्रीमद्भागवत के माहात्म्य में कथा आती है कि भक्ति महारानी कलयुग के प्रभाव से वृद्ध हो गई थीं और उनके दो पुत्र 'ज्ञान' और 'वैराग्य' अचेत (मूर्छित) पड़े थे। तब सनकादिक ऋषियों ने नारद जी को भागवत कथा का आयोजन करने को कहा। जैसे ही कथा शुरू हुई, ज्ञान और वैराग्य चैतन्य होकर नाचने लगे। यह व्याख्यान सिद्ध करता है कि यह साधना मृतप्राय भावनाओं और सोए हुए भाग्य को जगाने वाली है।


6. साधना के विशेष नियम

6. Special rules of sadhana

  • पवित्रता: पाठ के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य और सात्विक आहार (फलाहार श्रेष्ठ है) का पालन करें।

  • श्रवण: केवल पाठ कराना पर्याप्त नहीं, यथाशक्ति कथा का श्रवण (सुनना) अनिवार्य है।

  • दान: कथा की पूर्णाहुति पर यथाशक्ति अन्न दान और ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए।