Service

Astro provides online Puja service

संकटमोचन हनुमानाष्टक(Sankat Mochan Hanumanashtak)

अनुष्ठान सेवा शुल्क 7100 है 

Anushthan Seva Fee is Rs 7100

यदि आप इसे घर पर करवाते है तो मार्ग में आने जाने का व्यय अलग से देय होगा और पूजन सामग्री स्वयं से लानी होगी 

 If you get it done at home, then the travel expenses will be payable separately and you will have to bring the puja materials yourself.


संकटमोचन हनुमानाष्टक हनुमान जी की आराधना के लिए सबसे लोकप्रिय और शक्तिशाली स्तोत्रों में से एक है। जैसा कि इसके नाम 'संकटमोचन' से स्पष्ट है, यह दुखों और बाधाओं को हरने वाला है।


1. संकटमोचन हनुमानाष्टक क्या है? (What is Sankat Mochan Hanumanashtak?)

यह हनुमान जी को समर्पित आठ छंदों (अष्टक) की एक स्तुति है। इसमें हनुमान जी के उन आठ महान कार्यों का वर्णन है जहाँ उन्होंने देवताओं और अपने भक्तों के बड़े से बड़े संकट दूर किए थे।

  • सर्वप्रथम किसने किया (Who did it first): इसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी।

  • उल्लेख (Mention): इसका उल्लेख स्वतंत्र स्तुति के रूप में मिलता है और यह तुलसीदास जी की महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है।


2. महत्व और लाभ (Significance and Benefits)

इसका महत्व "संकट कटे मिटे सब पीरा" की भावना पर आधारित है:

  • ग्रह बाधा निवारण: शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए यह अचूक है।

  • आत्मविश्वास में वृद्धि: भय, घबराहट और मानसिक असुरक्षा को दूर करता है।

  • कार्यों में सफलता: रुके हुए काम या कानूनी अड़चनों को खत्म करने में सहायक है।

  • असाध्य रोगों से मुक्ति: हनुमान बाहुक की तरह यह भी शारीरिक कष्टों में राहत देता है।


3. किन परिस्थितियों में किया जाता है? (In what circumstances is it performed?)

जब मनुष्य को लगे कि चारों तरफ से संकटों ने घेर लिया है और कोई रास्ता नहीं दिख रहा, तब हनुमानाष्टक का सहारा लिया जाता है:

  • अचानक आए भारी आर्थिक संकट में।

  • शत्रु भय या कोर्ट-कचहरी के मामलों में।

  • जब संतान या परिवार पर कोई विपत्ति हो।


4. नियम और पाठ की विधि (Rules and Procedure for Recitation)

हनुमान जी की पूजा में अनुशासन बहुत महत्वपूर्ण है:

  • शुद्धता: स्नान के बाद लाल वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।

  • दिशा: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।

  • भोग: हनुमान जी को बूंदी, बेसन के लड्डू या गुड़-चना अर्पित करें।

  • दीपक: चमेली के तेल या शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।

  • सावधानी: पाठ करते समय उच्चारण शुद्ध होना चाहिए और मन में हनुमान जी के प्रति पूर्ण समर्पण होना चाहिए।


5. समय और ब्राह्मणों की आवश्यकता (Duration and Requirement of Brahmins)

  • समय (When to do): इसका पाठ वैसे तो कभी भी किया जा सकता है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को करना विशेष फलदायी है। संकट के समय लगातार 8 या 108 बार पाठ करना चाहिए।

  • ब्राह्मणों की संख्या (Number of Brahmins): साधारण मनोकामना के लिए भक्त स्वयं पाठ कर सकता है। लेकिन यदि कोई बड़ा संकट है, तो  2 ब्राह्मणों द्वारा इसका विधिवत अनुष्ठान कराया जाता है। यह अनुष्ठान 3 दिनों तक चल सकता है।


6. कैवल्य एस्ट्रो ऐप के माध्यम से अनुष्ठान (Performing via Kaivalya Astro App)

कैवल्य एस्ट्रो ऐप आपको बिना किसी असुविधा के इस दिव्य पाठ का लाभ उठाने में मदद करता है:

  1. पंडित चयन (Expert Selection): आप ऐप पर उपलब्ध अनुभवी कर्मकांडी ब्राह्मणों का चयन कर सकते हैं जो आपकी ओर से शुद्ध पाठ करेंगे।

  2. नाम और गोत्र संकल्प (Sankalp): पूजा की शुरुआत में पंडित जी आपके नाम और गोत्र का उच्चारण कर आपकी विशेष समस्या के निवारण के लिए संकल्प लेते हैं।

  3. डिजिटल सहभागिता (Digital Participation): आप अपने घर से ही ऐप के माध्यम से लाइव अनुष्ठान का हिस्सा बन सकते हैं और मंत्रों की शक्ति का अनुभव कर सकते हैं।

  4. दोष निवारण परामर्श (Consultation): पाठ के साथ-साथ ऐप के ज्योतिषी आपको यह भी बताते हैं कि आपके संकट का ज्योतिषीय कारण क्या है और इसके लिए आपको अन्य कौन से उपाय करने चाहिए।